प्रोटेक्टिव CIRCUIT BREAKER

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 प्रोटेक्टिव रिले का वर्गीकरण


प्रोटेक्टिव रिले का वर्गीकरण विविध प्रकार से किया गया है


CIRCUIT BREAKER

[1] इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रिले


[2] परमानेंट मैग्नेट मूविंग कॉइल रिले


[3] पोलेराइजड रिले


[4] इलेक्ट्रोडायनेमिक रिले


[5] इंडक्शन रिले


[6] मोटर पेटर्न  रिले


[7] थर्मल रिले


[8] गैस ऑपरेटेड रिले


[9] स्टैटिक रिले 



[1] इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रिले


फेरोमैग्नेटिक भाग पर मैग्नेटिक फील्ड के असर  के सिद्धांत पर यह रिले काम करती है इस प्रकार की रिले सोलेनाइड प्रकार का अथवा अट्रैक्टेड आर्मेचर प्रकार का या मूविंग आयर्न प्रकार का हो सकता है


[2] परमानेंट मैग्नेट मूविंग कॉइल रिले


परमानेंट मैग्नेट चुंबकीय क्षेत्र में रखी गई  कोईल में से प्रवाहित होने वाले करंट  से रिले ऑपरेट होता है


[3]  पोलेराइजड रिले


इस प्रकार के रिले में रिले का ऑपरेशन करंट की दिशा के आधार पर  होता है


[4] इलेक्ट्रोडायनेमिक रिले


इस प्रकार के रिले में दो अथवा दो से अधिक प्रकार की कोईले होती है  कोई में प्रवाहित होने वाला करंट के कारण उत्पन्न होने वाले फ्लक्स के इंटरेक्शन के कारण रिले ऑपरेट होता है


[5] इंडक्शन रिले


इंडक्शन रिले में एक अथवा एक से अधिक प्रकार का अल्टरनेटिंग चुंबक क्षेत्र और उसमें कंडक्टिंग मेंबर में  इंड्यूस होने वाले करंट के इंटरेक्शन  से रिले ऑपरेट होता है


[6] मोटर पेटर्न  रिले


इस प्रकार की  मोटर की तरह  आर्मेचर घूमता है इससे रिले ऑपरेट होता है


[7] थर्मल रिले


इसमें इलेक्ट्रिक करंट प्रवाहित होने से उसमें से पैदा होने वाली   उस्मा के कारण  रिले ऑपरेट होता है


[8] गैस ऑपरेटेड रिले


गैस ऑपरेटेड रिले में  ऑयल होता है इनमें स्पार्किंग होने के कारण उसमें गैस उत्पन्न होता है जिसके कारण रिले ऑपरेट होता है


[9] स्टैटिक रिले 


इस प्रकार के रिले में में कोई भी मूविंग पार्ट नहीं होता ट्रांजिस्टर तथा लीनियर और डिजिटल इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का उपयोग किया जाता है



फंक्शन के आधार पर रिले का वर्गीकरण


 

[1] मेजरिंग रिले


  • [1.1] करंट रिले
  • [1.2] वोल्टेज रिले
  • [1.3] पावर रिले
  • [1.4]  फ्रिकवेंसी रिले



[1.5] डायरेक्शनल रिले [ A.C ]


  •  [1.5.1] रिवर्स पावर रिले
  •  [1.5.2] रिवर्स करंट रिले


[1.6]  डायरेक्शनल रिले [ D.C ]


[1.7]  डिफरेंशियल रिले


[1.8] करंट अनबैलेंस रिले


[1.9] वोल्टेज अनबैलेंस रिले


[1.10] नेगेटिव फेज सीक्वेंस रिले [ रिवर्स  फेज सीक्वेंस रिले ]


[1.11] नेगेटिव फेज सीक्वेंस वोल्टेज रिले [ रिवर्स फेज सीक्वेंस वोल्टेज ]


[1.12] डेफिनेट डिस्टेंस रिले


[1.13] टाइम डिस्टेंस रिले


[1.14]  Bised रिले



[1] मेजरिंग रिले


जब किसी क्वांटिटी की कीमत अमुक हद से ज्यादा अथवा कम हो जाती हैं तब इस प्रकार के रिले का उपयोग किया जाता है नीचे विविध प्रकार के मेजरिंग रिले बताए गए हैं


[1.1] करंट रिले


जब रिले में से  प्रवाहित होने वाली करंट की कीमत पूर्व निर्धारित कीमत तक पहुंचती है तब ऑपरेट होने वाले रिले को करंट रिले कहा जाता है  इस प्रकार के रिले में ओवर करंट और अंडर करंट रिले का समावेश  होता है अंडर करंट रिले में करंट की कीमत अमुक हद से कम होती है तभी रिले ऑपरेट होता है


[1.2] वोल्टेज रिले


जब वोल्टेज की कीमत निर्धारित कीमत से ज्यादा हो जाती हो अथवा निर्धारित कीमत से वोल्टेज की वैल्यू कम हो जाता हो तब रिले ऑपरेट होता है जिसे वोल्टेज रिले कहते हैं इसमें ओवर वोल्टेज और अंडर वोल्टेज रिले का समावेश होता है


[1.3] पावर रिले


जब पावर की कीमत पूर्व निर्धारित कीमत से ज्यादा अथवा कम होती हो तब यहा पर का रिले ऑपरेट होता है इस प्रकार  का  रिले ओवर  पावर  तथा अंडर  पावर का हो सकता है


[1.4]  फ्रिकवेंसी रिले


इस प्रकार की  रिले में फ्रीक्वेंसी की कीमत पूर्व निर्धारित कीमत से कम अथवा ज्यादा होती हो तब या रिले ऑपरेट होता है इस प्रकार का रिले ओवर फ्रीक्वेंसी रिले तथा अंडर फ्रीक्वेंसी का समावेश होता है



[1.5] डायरेक्शनल रिले [ A.C ]


इस प्रकार का रिले अल्टरनेटिंग क्वांटिटी के बीच के  फेज रिलेशन पर ऑपरेट होता है नीचे दर्शाए गए हैं


  • [1.5.1] रिवर्स पावर रिले


(a) इस प्रकार के रिले में जब वोल्टेज और करंट फेस में होते हैं तब महत्तम torque पैदा होता है और वोल्टेज में कमी होने से कंपनसेशन नहीं होता और इस प्रकार के रिले को रिवर्स पावर रिले कहा जाता है 

(b) जब रिले में वोल्टेज और करंट के बीच में फेज  डिस्प्लेसमेंट 0 की  सीवाय पूर्व निर्धारित कीमत पर पहुंचती है  इसमें महत्तम Torque पैदा होता है  और वोल्टेज  के कमी में कोई भी कंपनसेशन नहीं होता  है

  • [1.5.2] रिवर्स करंट रिले


ऊपर दर्शाए गए (a)  और (b)  के प्रमाण पर  महत्तम torque मिलता है परंतु वोल्टेज के  घटाव के सामने कंपनसेशन दिया जाता है और इस प्रकार के रिले को रिवर्स करंट रिले कहा जाता है


[1.6]  डायरेक्शनल रिले [ D.C ]


डायरेक्शनल प्रकार का रिले करंट की दिशा के आधार पर ऑपरेट होता है इसमें सामान्य रूप से परमानेंट मैगनेट मूविंग कॉइल प्रकार का रिले होता है


[1.7]  डिफरेंशियल रिले


इसमें दो अथवा दो से अधिक प्रकार की वाइंडिंग होती है और दो अथवा दो से अधिक इलेक्ट्रिकल क्वांटिटी के स्केलर या व्यक्ति के अंतर पर ऑपरेट होता है


[1.8] करंट अनबैलेंस रिले


जब पुलिस सिस्टम में करंट पूर्व निर्धारित प्रमाण से अधिक अन बैलेंस होता हो तब यह इस प्रकार  का रिले  ऑपरेट होता है


[1.9] वोल्टेज अनबैलेंस रिले


जब पॉलिफेज सिस्टम में वोल्टेज पूर्व निर्धारित से अधिक अन बैलेंस होता है तब इस प्रकार का रिले ऑपरेट होता है


[1.10] नेगेटिव फेज सीक्वेंस रिले [ रिवर्स  फेज सीक्वेंस रिले ]


जब  पॉलिफेज सिस्टम में करंट पूर्व निर्धारित प्रमाण से अधिक प्रमाण में अनबैलेंस होता है तब यह प्रकार करेला ऑपरेट होता है अथवा बैलेंस करंट सीक्वेंस  रिवर्स होता है तब यह रिले ऑपरेट होता है  कुछ प्रकार के रिले तो करंट की कीमत/ रेटिंग पर ऑपरेट होता है 


[1.11] नेगेटिव फेज सीक्वेंस वोल्टेज रिले [ रिवर्स फेज सीक्वेंस वोल्टेज ]


जब पॉलिफेज सिस्टम में वोल्टेज पूर्व निर्धारित प्रमाण से अधिक प्रमाण में अनबैलेंस  होता है तब यह प्रकार का रिले ऑपरेट होता है अथवा बैलेंस वोल्टेज सीक्वेंस  रिवर्स होता है तब यह रिले ऑपरेट होता है  कुछ प्रकार के रिले तो वोल्टेज की कीमत / रेटिंग पर ऑपरेट होता है 


[1.12] डेफिनेट डिस्टेंस रिले 


इस प्रकार के रिले में रिले के ऑपरेशन और फॉल्ट के बीच के अंतर पर आधार रखता है डिजाइन के आधार पर अंतर रिएक्टेंस या एमपीडस प्रकार का फंक्शन है 


[1.13] टाइम डिस्टेंस रिले


इस प्रकार के रिले डिस्टेंस के प्रमाण  ऑपरेट होता है  परंतु डिस्टेंस के प्रमाण में टाइम  लेग होता है


[1.14]  Bised रिले


इसमें अधिक वाइंडिंग होने से रिले की सेटिंग में फेरफार होता है  यह फेरफार प्रोटेक्टेड  सर्किट के कंडीशन पर आधारित है 


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