D.C GENERATOR [ डी. सी जनरेटर ]

D.C GENERATOR  [ डी. सी  जनरेटर ]


बिजली का पहला खोज DC [ डायरेक्ट करेंट ] था 

जनरेटर को रसायनिक प्रभाव से बिजली  प्राप्त करने के बाद विकसित किया गया था इसलिए DC [डायरेक्ट करंट] का बहुत महत्व था वर्तमान समय में देखा जाये तो ट्रांसमिशन लाइन , जनरेशन , डिस्ट्रीब्यूशन और एप्लीकेशन अब DC [ डायरेक्ट करंट ]  जगह AC  करंट का उपयोग होने लगा 

धीरे धीरे DC सप्लाई का उपयोग बहोत कम होने लगा अब तो AC सप्लाई का उपयोग DC  SUPPLY से ज्यादा होने  लगा 

हम इस पाठ [ CHAPTER ] में DC जनरेटर का  PRINCIPAL OF OPERATION , CONSTRUCTION [निर्माण / रचना] , TYPE [प्रकार ], CHARACTERSTIC [ लाक्षणिकता  ] , ARMATURE REACTION के बारे में बताया गया है 


DC जनरेटर का सिंद्धात 


DC  जनरेटर यह यांत्रिक ऊर्जा का इलेक्ट्रिकल एनर्जी में  रूपांतरण करता है 
किसी भी दो पोल के बीच उत्त्पन्न होनेवाला FEILD WINDING से मैग्नेटिक फ्लक्स का निर्माण होता है 
DC जनरेटर ,में आर्मेचर को प्राइम मोवेर से जोड़ा जाता है और प्राइम MOVER टॉर्क पैदा करता है 

इसलिए आर्मेचर घूमता है और आर्मेचर चुंबकीय क्षेत्र को काटता है इसलिए आर्मेचर को आर्मेचर की तरह प्रेरित  किया जाता है 


PRINCIPLE OF D.C GENERATOR



जब लोड आर्मेचर से जुड़ा  होता है तो आर्मेचर कन्डक्टरो से इलेक्ट्रिक करंट बहता है लोड के माध्यम से और आर्मेचर कंडक्टर पर वापस  जाता है अब, जैसे की आर्मेचर के माध्यम से करंट प्रवाह होता है और यह चुम्कीय क्षेत्र में है इसके कारण टॉर्क उत्पन्न होता है 
इस टॉर्क को बैक [ BACK ] टॉर्क कहा जाता है 

क्युकी इस टॉर्क की दिशा प्राइम मोवेर के टॉर्क के विरूद्ध दिशा में होती है और अगर जनरेटर पर लोड बढ़ता है तो उसका टॉर्क भी बढ़ जाता है इसलिए प्राइम मोवेर का टॉर्क भी बढ़ता है और प्राइम मूवर का इनपुट पावर भी बढ़ता है 

इस तरह जनरेटर मैकेनिकल एनर्जी का इलेक्ट्रिकल एनर्जी में परिवर्तन होता है आइये अब हम, सीखते है की डीसी जनरेटर में ईएमएफ का कैसे उत्प्नन्न होता है 

एक कोइल  जिसको हम A,B और  C ,D को चुम्कीय क्षेत्र में रखा जाता है मतलब इसके दोनों तरफ चुंबक रखा है दोनों चुंबक को N POLE और  S POLE में रखा जाता है 

इस कोइल को CLOCK WISE DIRECTION में घूमाते है तो इस आकृति में बताये अनुशार कंडकटर A , B और  C, D चुंबकीय क्षेत्र को काटते है अर्थात इसमें ईएमएफ जेनेरेट होता है 


यह ईएमएफ 

e  =  B l  v   volt

जंहा पर 

B  =  ,मैग्नेटिक फ्लक्स इन डेन्सिटी 

l  =  लेन्थ ऑफ़ कंडक्टर इन मीटर 

v  =  वेलोसिटी   pf  कंडक्टर इन   m / sec


जनरेटर में प्रेरित ईएमएफ का निर्देशन यह फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम पर पाया गया है फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के  अंगूठे के नियम में पहली अंगुली, दूसरी अंगुली और अंगूठे को बताया गया है जिसमे फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के  अंगूठे के नियम में पहली अंगुली  डायरेक्शन ऑफ़ मैग्नेटिक फील्ड [ Direction of magnetic field ] को, दूसरी अंगुली डायरेक्शन ऑफ़ ईएमएफ इंड्यूस्ड इन कन्डक्टर [ Direction of emf induced in the conductor  को और अंगूठे को डायरेक्शन ऑफ़ मोशन ऑफ़ कंडक्टर [ Direction of motion of the conductor ]   बताया गया है 


चित्र  बताये अनुसार दो मैग्नेटिक पोल  घूमती कोइल A,B,C,D दिया गया है अब  दो मैग्नेटिक पोल  घूमती कोइल यह क्लॉक वाइज दिशा में प्रेरित ईएमएफ  A और  B  तक है और कंडक्टर C और D निचे की दिशा में  जाता है इसलिए ईएमएफ की प्रेरित दिशा  C और D तक होती है 

यदि कोइल मैग्नेटिक पोल के समांतर दिशा में होता तो मैग्नेटिक फ्लक्स काटता नहीं और ईएमएफ जेनेरेट नहीं  होता 


DC जनरेटर के भाग 


DC जनरेटर के मुख्या दो पार्ट है जिसमे  

[1] फील्ड सिस्टम और 
[2] आर्मेचर  

 समावेश होता है 

DC जनरेटर के मुख्या भाग में कौन कौन से पार्ट का समावेश होता है उसके बारे में जानेंगे 


[1] फील्ड सिस्टम


[A]  पोल ( POLE )
[B]  योक ( YOKE )
[C]  फील्ड वाइंडिंग ( FIELD WINDING )
[D]  आर्मेचर ( ARMATURE )
[E]  आर्मेचर वाइंडिंग ( ARMATURE WINDING )
[F]  कम्यूटेटर ( COMMUTATOR )
[G]  ब्रश और ब्रश होल्डर ( BRUSH AND BRUSH HOLDER )


[2] आर्मेचर  

[A] लैप वाइंडिंग ( LAP WINDING )
[B] वेव वाइंडिंग ( WAVE WINDING )

इस प्रकार के वाइंडिंग में और अधिक जानकरी और गहन अध्यन के इसमें पिच के बारे में  जरूरी हो जाता है जिसमे 



          पोल पिच ( Pole pitch ) Yp
बैक पिच  ( back pitch ) Yb
फ्रंट पिच  ( Front pitch ) Yf
रिसलटैंट पिच और वाइंडिंग पिच ( Resultant pitch or winding pitch ) Yr
कम्यूटेटर पिच ( Commutator pitch ) Yc
कोइल पिच और कोइल स्पान ( Coil pitch or coil span )
सिंगल लेयर और डबल लेयर ( Single layer and double layer )

का समावेश होता  है 


पोल पिच ( Pole pitch ) Yp

 दो पास के  पिचों के केन्द्रो  के बीच की दूरी  पोल पिच  कहते है यह दूरी कोइल साइड या स्लॉट्स की संख्या में ली जाती है 

पोल पिच  =   नंबर ऑफ़ स्लॉट्स और कोइल साइड्स / नंबर ऑफ़ पोल्स 

पोल पिच  =  24 / 4   =  6 


बैक पिच  ( back pitch ) Yb

कम्यूटेटर के विपरीत पक्ष में आये आर्मेचर कोइल के कोइल पक्षों की संख्या को बैक पिच के रूप में जाना जाता है 


फ्रंट पिच  ( Front pitch ) Yf

एक ही  सेगमेंट से जुड़े कोइल के कोइल साइड्स  बीच के किनारो की कुल संख्या को फ्रंट पिच कहते है 


 रिसलटैंट पिच और वाइंडिंग पिच ( Resultant pitch or winding pitch ) Yr


एक कोइल की शुरुआत और दूसरे कोइल की शुरुआत में ( जिसमे पहला कोइल पिच जुड़ा होता है  )बीच कोइल पक्षों की कुल संख्या  परिणाम को रिसलटैंट पिच और वाइंडिंग पिच ( Resultant pitch 
or winding pitch ) Yr  कहते है 



 कम्यूटेटर पिच ( Commutator pitch ) Yc


एक कोइल के कोइल स्लाइड्स को वाले कम्यूटेटर सेगमेंट को कम्यूटेटर पिच कहते है 
यदि  Yc  =  1  वाइंडिंग को सिम्पलेक्स वाइंडिंग कहते है

यदि यह दो के बराबर हो तो इससे डुप्लेक्स वाइंडिंग कहते है और अगर यदि तीन के बराबर है तो इससे 
हम ट्रिपलेक्स वाइंडिंग कहेंगे  यदि इसमें चार के बराबर हो तो इससे हम क्वाड्रप्लेक्स वाइंडिंग  कहेंगे 




 कोइल पिच और कोइल स्पान ( Coil pitch or coil span )


कोइल ले आपस में टकराये हुए किनारो के बिच स्लॉट्स की संख्या को कोइल पिच और कोइल स्पान ( Coil pitch or coil span ) कहते है 

EXAMPLE :- जैसे की एक कुंडल एक पक्ष के पहले स्लॉट्स में है तो फिर कोइल की अवधि 9 - 1 = 8  होगा 


COIL SPAN DC GENERATOR



 यदि कोइल पोल पिच के बराबर है तो उसे हम पूर्ण पिचींग वाइंडिंग कहेंगे 


सिंगल लेयर और डबल लेयर ( Single layer and double layer )


सिंगल लेयर और डबल लेयर ( Single layer and double layer )  में केवल एक कोइल के साइड को एक स्लॉट् में  रखा जाता है जबकि डबल लेयर वाइंडिंग में दो कोइल साइड होते है जिसमे एक कोइल को ऊपर के स्लॉट में और दूसरा नीचे के स्लॉट में रखा जाता है 

यही देखा जाये तो वैसे एक कोइल  ऊपर की तरफ में  और नीचे का कोइल नीचे के स्लॉट में ही रखा जाता है 





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